कविता शायरी 

समय

ऐ समय! तू ही बता,
तुझे दोस्त मानूँ या बला।
तेरे संग में चलना ही भला,
तेरे रंग में रंगना है कला।

गुरु मान तुझको पूजता हूँ,
समय की परीक्षा जीतता हूँ।
जब काम हो ना कोई भला,
तब मान लूँ तुझको बला।

चल चलें कुछ कर दिखायें,
उन लोगों को कुछ तो सिखायें।
बेठें हैं जो यूँ ही खाली,
क्यों वो अपना समय गवांयें।

समय की देख महत्वता को,
बाजी कोई खेल जाएं।
बजा दे डंका जीत का,
और वक़्त से कदम मिलायें।

करलें समय को मुठ्ठी में,
की हो सफलता हासिल हमें।
प्रशिक्षित करें, स्वयं को हम इतना,
की चौबीस में छत्तीस काम करलें।

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